गर्भाशय की संरचनात्मक विकृतियां और टेस्ट ट्यूब बेबी की सफलता -क्या इनका कोई सम्बन्ध है -अगर है तो क्या करें ,क्या ना करें

गर्भाशय की संरचनात्मक विकृतियां और टेस्ट ट्यूब बेबी की सफलता  -क्या इनका कोई सम्बन्ध है -अगर है तो क्या करें ,क्या ना करें 

 

गर्भाशय की संरचनात्मक विकृतियां-परिभाषा 
 
यह विकृतियां या तो जन्मजात हो सकती हैं या फिर समय के चलते बाद में गर्भाशय में उत्त्पन्न हो गयी हो सकती हैं।
न विकृतियों से होने वाली प्रमुख समस्याएं 
 
1) Primary Amenorrhoea – इसका मतलब है की इस युवती को महावारी यानि कि periods कभी शुरू ही नहीं हुए।
2) Dysmenorrhoea –  महावारी के समय पेट के निचले भाग में (पेड़ू ) में दर्द होना।
3) Infertility – बंधत्व -गर्भ का ना ठहर पाना।
4) Recurrent Pregnancy Loss -बार -बार अकस्मात् गर्भपात होना।
5) Preterm Labor – प्रसव का समय से पूर्व हो जाना और अपरिपक़्व शिशु का जन्म होना।
6) Abruptio Placentae – नाल का प्रसव से पूर्व जगह छोड़ देना और गर्भाशय में खून का जमा होना।
7) PROM – Preterm Rupture of Membranes -भ्रूण के आस -पास की झिल्ली का प्रसव के समय से पहले फट जाना और (Amniotic Fluid )भ्रूण आवरण द्रव  का निकल जाना।
गर्भाशय की जन्मजात  संरचनात्मक विकृतियां होती ही क्यों हैं – 
-यह जानने के लिए सबसे पहले आइए देखते हैं कि भ्रूणावस्था में गर्भाशय की रचना कैसे होती है और उस प्रक्रिया में क्या कमी रह जाए तो संरचनात्मक विकृतियां सामने आती हैं
-भ्रूणावस्था में भ्रूण के शरीर के निचले भाग में दोनों तरफ एक-एक Mullerian Duct -मुल्लेरियन डक्ट की रचना होती है। यह एक खोखले नलकी (Tube ) जैसी संरचना है
-समय के साथ यह नलकियाँ पास आती जाती हैं। अन्ततः ये दोनों नलियाँ एक दूसरे से जुड़ जाती हैं ,इनके बीच की दीवार मिट जाती है। गर्भाशय की गुहा (cavity ) की स्थापना हो जाती है। इसी गुहा में भ्रूण का आकर ठहरना और उससे शिशु का बनना तय है।
-अगर मुल्लेरियन डक्ट ठीक से बने नहीं, या जुड़े नहीं ,या उनके बीच की दीवार ठीक से मिटे नहीं, तब गर्भाशय की जन्मजात विकृतियों उत्पन्न होती हैं -Congenital Malformations of Uterus
-इन सभी जन्मजात विकृतियों की तीव्रता का पैमाना हर एक मरीज़ में अलग अलग हो सकता है।
-कभी विकृतियाँ सम्पूर्ण होती हैं और कभी अपूर्ण।
कुछ विकृत गर्भाशयों के नामों की सूची हम यहां बता देते हैं -List of Some Uterine Anomalies 
1) Bicornuate Uterus – दोनों नलकियाँ भी अलग हैं ,दोनों गुहाएँ भी अलग हैं
2) Hemicornuate Uterus /Unicornuate Uterus -केवल एक ही तरफ़ की नलकी बनी है पर उसमें गुहा भी है
3) Septate Uterus -Complete or Partial -दोनों नलकियाँ मिली तो सही पर उनके बीच की दीवार मिटी नहीं।  इसकी विविधताएं हैं- सम्पूर्ण या अपूर्ण।
4) Aplastic Uterus – दोनों नलकियाँ पूरी तरह से अनुपस्थित हैं।
एक युवती की विभिन्न आयुओं में इन  विकृतियों का प्रस्तुतीकरण कैसे भिन्न -भिन्न प्रकार से होता है ,आइये देखते हैं। 
A) अल्प युवावस्था (Early Puberty ) में होने वाले लक्षण –
-मासिक धर्म के समय भयंकर दर्द होना
B) प्रजनन काल ( Reproductive  Age )में होने वाले लक्षण –
1) बारंबार अल्पकालीन गर्भपात होना (Recurrent early pregnancy loss )
2) अपरिपक्व प्रसूती ( Preterm labor )
3) असामयिक गर्भ झिल्ली का टूटना (Premature rupture of membranes )
4) शिशु का पैर की तरफ से जन्म लेने  स्थिति में होना ( Breech Presentation )
5) बाधित प्रसूति (Obstructed labor )- जन्म प्रक्रिया के समय शिशु का रास्ते में ही अटक जाना
6) गर्भाशय के एक तरफ़ा मौलिक सींग में गर्भावस्था का ठहर जाना (Cornual pregnancy in rudimentary horn of the uterus )
गर्भाशय की संरचनात्मक विकृतियां- और प्रतिशत संभावनाएं 
1) बंधत्व (Infertility )- ५%
2) बारंबार  गर्भपात होना -७.५ %
भिन्न भिन्न प्रकार की विकृतियों के साथ गर्भस्थ शिशु के विभिन्न प्रस्तुतिकरण -(Different presentations of fetus in  different uterine anomalies )
1) –द्वी -सींग गर्भाशय (Bicornuate uterus )-मस्तक के बल (Cephalic presentation )

2) पर्दामय गर्भाशय (Septate uterus ) –शिशु का पैर की तरफ से जन्म लेने  स्थिति में होना ( Breech Presentation )

3) धनुषाकार गर्भाशय (Arcuate uterus )- शिशु का आड़ी तरह से गर्भाशय में लेटा होना (Transverse Lie )
4) एकमेव सींग वाला गर्भाशय (Unicornuate Uterus )-शिशु के हाथ का गर्भाशय से लटकना (Hand Prolapse )
गर्भाशय की विकृतियां और कृत्रिम प्रजनन तरीकों की सहायता से ठहराया गया गर्भ (Assisted Reproductive Techniques ) -आगे क्या होगा 
1) गर्भावस्था की दर का कम होना (Lower  Pregnancy Rate )
2) गर्भावस्था की पहली तिमाही में स्वभाविक रूप से होने वाले और चूक गये  गर्भपात की उच्च दर (Higher rate of spontaneous and missed abortion/miscarriage  )
क्या कर सकते हैं 
१) पर्दामय गर्भाशय (Septate uterus ) – की स्थिति में -अगर शल्य क्रिया (Operation ) कर के पर्दे को निकाल देंगे (Septoplasty ) तो गर्भ के ठहरने और आगे जाने की संभावना बढ़ जायेगी।
-आजकल यह ऑपरेशन दूरबीन विधि से होता है (Hysteroscopic Resection of Septum )
-अगर बिना इस शल्य क्रिया को  किये कृत्रिम प्रजनन तरीकों की सहायता से अगर गर्भ ठहरा भी दिया गया तो     ७० % सम्भावना है कि या तो गर्भपात हो जाएगा या फिर समय पूर्व प्रसव हो जाएगा
२) हालांकि एकमेव सींग वाला गर्भाशय (Unicornuate Uterus )की स्थिति सबसे दुर्लभ( Rare)  है पर इस अवस्था में गर्भ के नुकसान की (Pregnancy Loss ) संभावना सबसे ज़्यादा है।
महत्तम दर ५० फीसदी (50 %) तक हो सकती है।
जबकि बाकी विकृतियों में नुकसान की दर ५-१३ % तक है।
-एकमेव सींग वाला गर्भाशय (Unicornuate Uterus ) अगर मासिक धर्म के समय बहुत दर्द दे रहा है तो दूरबीन विधि से उस सींग को निकाला जा सकता है (Laparoscopic Removal of Non -Communicating Rudimentary Horn of Uterus )
३) द्वी -सींग गर्भाशय (Bicornuate uterus )
सबसे आमतौर (Common ) पर पायी जाने वाली विकृति है।
-औरत को इसमें गर्भ ठहरने में कोई कठिनाई नहीं होती।
-सामान्यतः इन औरतों को गर्भावस्था के दौरान कोई खास इलाज की ज़रुरत नहीं होती
-गर्भाशय के मुहँ (ग्रीवा) को गैर शोषक टांका      (Cervical Cerclage Using Non – Absorbable Suture Material )देने से कितना फायदा होगा – यह भी स्पष्ट नहीं है।
-अगर बारम्बार गर्भपात या समय पूर्व प्रसव (Preterm Delivery ) हो रही है तो गर्भाशय के दोनों सींगों को संयुक्त करने की  दूरबीन द्वारा  शल्य क्रिया (Laparoscopic Metroplasty ) ज़रूर से मरीज़ को सहायता करेगी।
४) धनुषाकार गर्भाशय (Arcuate uterus )- की वजह से गर्भ को कोई भी नुक्सान नहीं होता है अतः इस विकृति को एक मौके पर मिली खोज (Chance Finding ) समझ कर छोड़ देना चाहिये।  किसी भी तरह के उपचार या शल्य क्रिया की कोई ज़रुरत नहीं है।
आप कोई भी निर्णय लें ,अपने गायनेकोलॉजिस्ट (Gynecologist ) डॉक्टर की सलाह से ही लें।
स्वस्थ रहें ,सुखी रहें

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By
Dr Himani Gupta
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