कष्टमय और उलझी हुई नार्मल डिलीवरी -इसका क्या फायदा

  • April 16, 2021

Written by
Dr Himani Gupta
Consulting Gynecologist in Kharghar, Navi Mumbai

गर्भावस्था के नौं महीने पूरे होते होते तक प्रसूति तज्ञ यानी कि गायनेकोलॉजिस्ट को पता चलने लग जाता है कि क्या इस माता कि नार्मल डिलीवरी हो सकती है। 

कभी कभी गर्भाशय या बच्चेदानी का मुँह छोटा होता है , कभी कभी बच्चे का शरीर ही बड़ा होता है और नार्मल डिलीवरी होना कठिन है ऐसा अंदाजा आ जाता है। 

चाहे कितना भी समझाओ ,फिर भी मरीज़ और उसके रिश्तेदार नार्मल डिलीवरी की ही तरफ झुके रहते हैं 

यह डिलीवरी  इतनी कष्टमय और उलझी  हुई हो सकती है कि औरत के शरीर के नीचे का भाग पूरा फट सकता है। 

 डिलीवरी के लिए चिमटा या वैक्युम लगाना पड़ सकता है 

बहुत सारे टाँके आ सकते हैं। 

पेशाब की नलकी या संडास की जगह को नुक्सान हो सकता है। 

बच्चे के सिर को चोट पहुँच सकती है 

आप ही बतायें , क्या इस प्रकार की डिलीवरी नार्मल है ?

या सिर्फ नीचे से हुई चीर फाड़। 

क्या सुरक्षित सेज़रीन डिलीवरी करना , माँ और बच्चे दोनों के लिए बेहतर नहीं होगा ?

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